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श्लोक 2.9.213  |
पत्र पाञा विप्रेर हैल आनन्दित मन ।
प्रभुर चरणे धरि’ करये क्रन्दन ॥213॥ |
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| अनुवाद |
| कूर्म पुराण की मूल पाण्डुलिपि प्राप्त करके रामदास विप्र अत्यन्त प्रसन्न हुए और तुरन्त ही श्री चैतन्य महाप्रभु के चरणकमलों में गिर पड़े और रोने लगे। |
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| Ramdas was very happy to find the original pages of Vipra Kurma Purana. He immediately fell at the lotus feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu and started crying. |
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