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श्लोक 2.9.210  |
पत्र लञा पुनः दक्षिण - मथुरा आइला ।
रामदास विप्रे सेइ पत्र आनि दिला ॥210॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु दक्षिणी मथुरा [मदुरै] लौट आए और रामदास विप्र को कूर्म पुराण की मूल पांडुलिपि सौंपी। |
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| Sri Chaitanya Mahaprabhu then returned to South Mathura (Madurai) and gave the original manuscript of Kurma Purana to Ramdas Vipra. |
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