श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  2.9.190 
प्रभु कहे, - ए भावना ना करिह आर ।
पण्डित हञा केने ना करह विचार ॥190॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "कृपया अब इस तरह न सोचें। आप एक विद्वान पंडित हैं। आप इस मामले पर विचार क्यों नहीं करते?"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, "Don't think like that now. You are a learned scholar. Why don't you think about this problem?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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