श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  2.9.189 
ए शरीर धरिबारे कभु ना युयाय ।
एइ दुःखे ज्वले देह, प्राण नाहि याय ॥189॥
 
 
अनुवाद
"साहब, अपने दुःख के कारण मैं अब और नहीं जी सकता। मेरा शरीर जल रहा है, पर प्राण नहीं निकल रहे।"
 
"My lord, I cannot live any longer because of this suffering. Although my body is burning, my life is not leaving me."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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