श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 184
 
 
श्लोक  2.9.184 
ताँर उपासना शुनि’ प्रभु तुष्ट हैला ।
आस्ते - व्यस्ते सेइ विप्र रन्धन करिला ॥184॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ब्राह्मण की पूजा-पद्धति सुनकर बहुत संतुष्ट हुए। अंततः ब्राह्मण ने जल्दी से भोजन बनाने की व्यवस्था की।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu was very pleased to hear the brahmin's method of worship. Finally, the brahmin arranged for the food to be cooked quickly.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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