श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  2.9.179 
सेइ विप्र महाप्रभुके कैल निमन्त्रण ।
राम - भक्त सेइ विप्र - विरक्त महाजन ॥179॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने वाले ब्राह्मण ने भगवान को अपने घर आमंत्रित किया। यह ब्राह्मण भगवान श्री रामचंद्र का एक महान भक्त और विद्वान था। वह सदैव भौतिक कार्यों से विरक्त रहता था।
 
The brahmin invited Mahaprabhu to his home. This brahmin was a great devotee and an expert on Lord Ramachandra. He was always detached from material pursuits.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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