श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  2.9.171 
प्रभु कहे, - तुमि पुनः आइस नीलाचले ।
आमि सेतुबन्ध हैते आसिब अल्प - काले ॥171॥
 
 
अनुवाद
तब श्री चैतन्य महाप्रभु ने उनसे कहा, "कृपया जगन्नाथ पुरी लौट जाओ, क्योंकि मैं रामेश्वर [सेतुबंध] से शीघ्र ही वहाँ लौटूंगा।"
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu said to him, “Please come back to Jagannatha Puri, because I will soon return there from Rameshwar (Setubandha).”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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