श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 164
 
 
श्लोक  2.9.164 
सङ्क्ते चलिला भट्ट, ना याय भवने ।
ताँरे विदाय दिला प्रभु अनेक यतने ॥164॥
 
 
अनुवाद
वेंकट भट्ट घर लौटना नहीं चाहते थे, बल्कि भगवान के साथ जाना चाहते थे। श्री चैतन्य महाप्रभु ने बड़ी मेहनत से उन्हें विदा किया।
 
Venkata Bhatta did not want to return home but wanted to go with them. Sri Chaitanya Mahaprabhu, with great effort, saw him off.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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