श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  2.9.151 
एत क हि’ प्रभु ताँर गर्व चूर्ण करिया ।
ताँरे सुख दिते कहे सिद्धान्त फिराइया ॥151॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने वेंकट भट्ट का अभिमान चूर कर दिया, किन्तु उन्हें पुनः प्रसन्न करने के लिए उन्होंने इस प्रकार कहा।
 
In this way Sri Chaitanya Mahaprabhu crushed the pride of Venkata Bhatta, but with the intention of pleasing him again, he spoke as follows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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