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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.9.15 
मल्लिकार्जुन - तीर्थे याइ’ महेश देखिल ।
ताहाँ सब लोके कृष्ण - नाम लओयाइल ॥15॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु तब मल्लिकार्जुन तीर्थ गए और वहाँ भगवान शिव के विग्रह के दर्शन किए। उन्होंने सभी लोगों को हरे कृष्ण महामंत्र का जप करने के लिए प्रेरित किया।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu then went to Mallikarjuna Tirtha and saw the Deity of Lord Shiva there. He also inspired everyone to chant the Hare Krishna mantra.
तात्पर्य
मल्लिकार्जुन को श्री शैल के नाम से भी जाना जाता है। यह कृष्णा नदी के दक्षिणी तट पर कर्नाल के उत्तर-पूर्व में लगभग एक सौ मील की दूरी पर स्थित है। गाँव के चारों ओर महान दीवारें हैं, और दीवारों के भीतर मल्लिकार्जुन के रूप में जाना जाने वाला देवता निवास करते हैं। यह भगवान शिव का देवता है और ज्योतिर-लिंगों में से एक है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)