श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 145
 
 
श्लोक  2.9.145 
तुमि ये पड़िला श्लोक, से हय प्रमाण ।
सेइ श्लोके आइसे ‘कृष्ण - स्वयं भगवान्’ ॥145॥
 
 
अनुवाद
“आपने ‘सिद्धान्तस त्व अभेदे ऋपि’ से प्रारम्भ होने वाला श्लोक पढ़ा है। यही श्लोक इस बात का प्रमाण है कि कृष्ण ही भगवान हैं।
 
“You have recited the verse beginning with ‘Siddhanta Tatsvabhedepi’. This verse itself is a witness that Krishna himself is the Supreme Personality of Godhead.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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