श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  2.9.135 
गोप - जाति कृष्ण, गोपी - प्रेयसी ताँहार ।
देवी वा अन्य स्त्री कृष्ण ना करे अङ्गीकार ॥135॥
 
 
अनुवाद
"भगवान कृष्ण ग्वाल समुदाय से हैं और गोपियाँ कृष्ण की परम प्रिय प्रेमिकाएँ हैं। यद्यपि स्वर्ग के निवासियों की पत्नियाँ भौतिक जगत में सर्वाधिक ऐश्वर्यशाली हैं, फिर भी न तो वे और न ही भौतिक ब्रह्मांड की कोई अन्य स्त्रियाँ कृष्ण की संगति प्राप्त कर सकती हैं।
 
"Lord Krishna belongs to the cowherd caste, and the cowherds are Krishna's most beloved lovers. Although the wives of the inhabitants of heaven are the most opulent in the material world, neither they nor other women of the material world can attain the proximity of Krishna."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd