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श्लोक 2.9.108  |
एइ - मत भट्ट - गृहे रहे गौरचन्द्र ।
निरन्तर भट्ट - सङ्गे कृष्ण - कथानन्द ॥108॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु वेंकट भट्ट के घर पर ही रहे और उनसे निरंतर भगवान कृष्ण के विषय में बातें करते रहे। इस प्रकार वे अत्यंत प्रसन्न हुए। |
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| Sri Chaitanya Mahaprabhu stayed at Venkata Bhatta's house and constantly talked about Lord Krishna. |
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