श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  2.8.97 
राय कहे , - इहार आगे पुछे हेन जने ।
एत - दिन नाहि जानि, आछये भुवने ॥97॥
 
 
अनुवाद
राय रामानन्द ने उत्तर दिया, "आज तक मैं इस भौतिक संसार में किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानता था जो भक्ति सेवा के इस पूर्ण स्तर से परे जिज्ञासा कर सके।
 
Ramanand Rai replied, “Till today I did not know anyone in this material world who could ask about what lies beyond this perfect state of devotion.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)