यद्यपि कृष्ण - सौन्दर्य - माधुर धुर्य ।
व्रज - देवीर सङ्गे ताँर बाड़ये माधुर्य ॥94॥
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अनुवाद
यद्यपि कृष्ण का अद्वितीय सौन्दर्य भगवान के प्रेम का सर्वोच्च माधुर्य है, किन्तु जब वे गोपियों के साथ होते हैं तो उनका माधुर्य असीम रूप से बढ़ जाता है। फलस्वरूप, गोपियों के साथ कृष्ण का प्रेम-विनिमय भगवान के प्रेम की सर्वोच्च पूर्णता है।
"Although Krishna's matchless beauty is the supreme sweetness of divine love, when he is in the company of the gopis, his sweetness is infinitely enhanced. Consequently, Krishna's exchange of love with the gopis is the ultimate perfection of divine love."
तात्पर्य
कृष्ण और उनके भक्त भगवद्भाव के प्रेम के सम्भोग-रस में एकात्म हो जाते हैं। अन्य रसों में, प्रभु और भक्त अत्यधिक आनंद का उतना पूर्ण आनंद नहीं ले पाते हैं। अगला श्लोक (श्रीमद भागवतम् १०.३३.६) इस बिंदु को दर्शाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥