सर्व-भूतेषु यः पश्येद् भगवद्-भावम् आत्मनः
भूतानि भगवत्य आत्मन्य एष भगवत उत्तमः
"उन्नत भक्त देखता है कि सभी जीवित संस्थाएं ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व के अंग हैं। हर कोई कृष्ण में है, और कृष्ण भी हर किसी के भीतर है। ऐसा दर्शन केवल उसी व्यक्ति के लिए संभव है जो भक्ति सेवा में बहुत उन्नत है।"
