‘विद्यापूरे’ नाना - मत लोक वैसे यत ।
प्रभु - दर्शने ‘वैष्णव’ हैल छा ड़ि’ निज - मत ॥301॥
अनुवाद
विद्यानगर के सभी निवासी अलग-अलग धर्मों के थे, लेकिन श्री चैतन्य महाप्रभु के दर्शन के बाद, उन्होंने अपने-अपने धर्म त्याग दिए और वैष्णव बन गए।
All the residents of Vidyanagar followed different religions, but after seeing Sri Chaitanya Mahaprabhu, they gave up their religions and became Vaishnavas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥