निगूढ़ व्रजेर रस - लीलार विचार ।
अनेक कहिल, तार ना पाइल पार ॥293॥
अनुवाद
रामानंद राय और श्री चैतन्य महाप्रभु के बीच हुए वार्तालापों में अत्यंत गोपनीय विषय समाहित हैं, जिनमें वृंदावन [व्रजभूमि] में राधा और कृष्ण के दाम्पत्य प्रेम का भी ज़िक्र है। हालाँकि उन्होंने इन लीलाओं पर विस्तार से चर्चा की, फिर भी वे चर्चा की सीमा तक नहीं पहुँच पाए।
The conversations between Ramanand Rai and Sri Chaitanya Mahaprabhu concerning the sweet love of Radha and Krishna in Vrindavan (Vrajabhumi) are profound. Although both discussed these pastimes at length, they could not fully grasp them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥