प्रचोदिता येन पुरा सरस्वती
वितन्वताजस्य सतीम् स्मृतिम् हृदि
स्व-लक्षणा प्रादुर्भूत किलास्यताः
स मे ऋषीणां ऋषभः प्रसीदताम्
"प्रभु, जिन्होंने सृष्टि की शुरुआत में ब्रह्मा के हृदय से प्रभावशाली ज्ञान को विस्तारित किया और उन्हें सृष्टि और उनके अपने पूर्ण ज्ञान से प्रेरित किया, और जो ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न हुए प्रतीत हुए, वे मुझ पर प्रसन्न हों।" यह श्रीमद् भागवतम को महाराज परीक्षित को सुनाने से पहले शुकदेव गोस्वामी द्वारा कहा गया था जब उन्होंने भगवान की कृपा का आह्वान किया था।
