श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 264
 
 
श्लोक  2.8.264 
एत तत्त्व मोर चित्ते कैले प्रकाशन ।
ब्रह्माके वेद येन पड़ाइल नारायण ॥264॥
 
 
अनुवाद
"आपने मेरे हृदय में ये सभी दिव्य सत्य प्रकट किए हैं। ठीक इसी प्रकार नारायण ने भगवान ब्रह्मा को शिक्षा दी थी।"
 
"You have revealed these many divine principles (truths) to my heart. Narayana taught Brahma in the same way."
तात्पर्य

ब्रह्मजी का हृदय भगवान् श्रीकृष्ण की कृपा से प्रकाशित था। स्वेताश्वतर उपनिषद (6.18) में वेदों में दी गई जानकारी इस प्रकार है:

यो ब्रह्माणं विदधाति पूर्वं

 यो वै वेदान्‍श्च प्रहिणोति तस्‍मै

तं ह देवं आत्‍म-बुद्धि-प्रकाशं

 मुमुक्षुर वै शरणमहम प्रपद्ये

“मैं परमपद की प्राप्ति की अभिलाषा करता हूँ, इसलिये मैं उस परमपद के भगवान के चरणों में शरणागत होता हूँ, जिन्होंने ब्रह्मजी के हृदय के माध्यम से वेदों का ज्ञान प्रकट कर ब्रह्मजी को सर्वप्रथम ज्ञान का प्रकाश दिया। वे भगवान ही ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति की मूल सत्ता हैं।” इस संदर्भ में श्रीमद्भागवतम 2.9.30-35, 11.14.3, 12.4.40 और 12.13.19 को भी पढ़ा जा सकता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)