श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 256
 
 
श्लोक  2.8.256 
‘उपास्येर मध्ये कोनुपास्य प्रधान?’ ।
‘श्रेष्ठ उपास्य - युगल ‘राधा - कृष्ण’ नाम’ ॥256॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने पूछा, “सभी पूजनीय वस्तुओं में प्रमुख कौन सी है?”
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu asked, “Of all the objects worthy of worship (upasya), which is the chief?” Ramanand replied, “The chief object worthy of worship is the name of Radha-Krishna – the Hare Krishna mantra.”
तात्पर्य
रामानंद राय ने उत्तर दिया, "सबसे प्रमुख पूजनीय वस्तु राधा और कृष्ण का पवित्र नाम है, हरे कृष्ण मंत्र है।"

श्रीमद-भागवतम (6.3.22) के अनुसार:

एतावान एव लोकेऽस्मिंं पुंसाँ धर्मः परः स्मृतः

भक्ति-योगो भगवति तन्-नाम-ग्रहणाऽऽदिभिः

"इस भौतिक जगत में जीव का एकमात्र कार्य भक्ति-योग के मार्ग को स्वीकार करना और भगवान के पवित्र नाम का जप करना है।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)