श्रीमद्-भागवतम (2.2.36) कहता है:
तस्मात् सर्वत्मना राजन् ह्रिश सर्वत्र सर्वदा
श्रोतव्य: कीर्तितव्यश्च स्मर्तव्यो भगवान् नृणाम्
शुकदेव गोस्वामी निष्कर्ष निकालते हैं, "जीवित प्राणी का कार्य हर परिस्थिति में हमेशा परम व्यक्तित्व ईश्वर को याद रखना है। सभी मनुष्यों द्वारा भगवान के बारे में सुना जाना चाहिए, उन्हें महिमामंडित किया जाना चाहिए और उन्हें याद किया जाना चाहिए।"
