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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 252
 
 
श्लोक  2.8.252 
‘काँहार स्मरण जीव करिबे अनुक्षण?’ ।
‘कृष्ण’ - नाम - गुण - लीला - प्रधान स्मर ण’ ॥252॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने पूछा, “सभी जीवों को क्या निरंतर स्मरण रखना चाहिए?”
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu asked, “What should all living beings constantly remember?” Ramanand Rai replied, “The main object of remembrance is always the name, qualities and pastimes of the Lord.”
तात्पर्य
रामानंद राय ने उत्तर दिया, "स्मरण के मुख्य उद्देश्य हमेशा भगवान का पवित्र नाम, गुण और लीलाएँ हैं।"

श्रीमद्-भागवतम (2.2.36) कहता है:

तस्मात् सर्वत्मना राजन् ह्रिश सर्वत्र सर्वदा

श्रोतव्य: कीर्तितव्यश्च स्मर्तव्यो भगवान् नृणाम्

शुकदेव गोस्वामी निष्कर्ष निकालते हैं, "जीवित प्राणी का कार्य हर परिस्थिति में हमेशा परम व्यक्तित्व ईश्वर को याद रखना है। सभी मनुष्यों द्वारा भगवान के बारे में सुना जाना चाहिए, उन्हें महिमामंडित किया जाना चाहिए और उन्हें याद किया जाना चाहिए।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)