श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 236
 
 
श्लोक  2.8.236 
‘मोरे कृपा करिते तोमार इहाँ आगमन ।
दिन दश र हि’ शोध मोर दुष्ट मन ॥236॥
 
 
अनुवाद
श्री रामानन्द राय ने कहा, "आप यहाँ केवल अपनी अहैतुकी कृपा दिखाने के लिए आए हैं। अतः कम से कम दस दिन यहाँ रहकर मेरे कलुषित मन को शुद्ध कीजिए।"
 
Sri Ramanand Rai said, "You have come here to show me your causeless kindness. Therefore, please stay here for at least ten days and purify my polluted mind."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)