सच्चिदानन्द - मय कृष्णेर स्वरूप ।
अतएव स्वरूप - शक्ति हय तिन रूप ॥154॥
अनुवाद
“मूलतः भगवान कृष्ण सच्चिदानन्द विग्रह हैं, जो शाश्वतता, आनन्द और ज्ञान का दिव्य रूप हैं; इसलिए उनकी व्यक्तिगत शक्ति, आंतरिक शक्ति, के तीन भिन्न रूप हैं।
“Basically Lord Krishna is the divine form of Sachchidananda-Vigraha i.e. eternity, knowledge and bliss, hence his personal power – inner power – has three diverse forms.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥