श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 8: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा श्री रामानन्द राय के बीच वार्तालाप  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  2.8.154 
सच्चिदानन्द - मय कृष्णेर स्वरूप ।
अतएव स्वरूप - शक्ति हय तिन रूप ॥154॥
 
 
अनुवाद
“मूलतः भगवान कृष्ण सच्चिदानन्द विग्रह हैं, जो शाश्वतता, आनन्द और ज्ञान का दिव्य रूप हैं; इसलिए उनकी व्यक्तिगत शक्ति, आंतरिक शक्ति, के तीन भिन्न रूप हैं।
 
“Basically Lord Krishna is the divine form of Sachchidananda-Vigraha i.e. eternity, knowledge and bliss, hence his personal power – inner power – has three diverse forms.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)