श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  2.7.89 
एइ - मत सन्ध्या पर्यन्त लोक आसे, याय ।
‘वैष्णव’ हइल लोक, सबै नाचे, गाय ॥89॥
 
 
अनुवाद
शाम तक लोग आते-जाते रहे और वे सभी वैष्णव भक्त बन गए तथा कीर्तन और नृत्य करने लगे।
 
People came and went until evening. They all became Vaishnava devotees and began singing and dancing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)