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श्लोक 2.7.74  |
नित्या नन्द प्रभु भट्टाचार्ये उठाइल ।
ताँर लोक - सङ्गे ताँरे घरे पा ठाइल ॥74॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान नित्यानंद प्रभु ने सार्वभौम भट्टाचार्य का पालन-पोषण किया और अपने सेवकों की सहायता से उन्हें उनके घर तक छोड़ा। |
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| Sri Nityananda Prabhu picked up Sarvabhauma Bhattacharya and sent him to his home with the help of his people. |
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