श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  2.7.73 
वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि ।
लोकोत्तराणां चेतांसि को नु विज्ञातुमीश्वरः ॥73॥
 
 
अनुवाद
"सामान्य आचरण से ऊपर उठने वालों का हृदय कभी वज्र से भी कठोर होता है, तो कभी फूल से भी कोमल। महान व्यक्तित्वों में ऐसे विरोधाभास कैसे समा सकते हैं?"
 
"Those with behavior superior to the average person's have hearts that are sometimes harder than a thunderbolt, and sometimes softer than a flower. Who can understand such contradictions in great men?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)