श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  2.7.64 
तोमार सङ्गेर योग्य तेंहो एक जन ।
पृथिवीते रसिक भक्त नाहि ताँर सम ॥64॥
 
 
अनुवाद
सार्वभौम भट्टाचार्य ने आगे कहा, "रामानंद राय आपकी संगति के लिए उपयुक्त व्यक्ति हैं; दिव्य प्रेम के ज्ञान में कोई अन्य भक्त उनकी बराबरी नहीं कर सकता।
 
Sarvabhauma Bhattacharya continued, "Ramananda Raya is a suitable person for your association. No other devotee can match him in his knowledge of the divine essences."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)