श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.7.63 
शूद्र विषयि - ज्ञाने उपेक्षा ना करिबे ।
आमार वचने ताँरे अवश्य मिलिबे ॥63॥
 
 
अनुवाद
"कृपया यह सोचकर उसकी उपेक्षा न करें कि वह भौतिक कार्यों में संलग्न एक शूद्र परिवार का है। मेरी प्रार्थना है कि आप उससे अवश्य मिलें।"
 
"Please do not ignore him, thinking he is a Shudra preoccupied with material pursuits. I request you to meet him."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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