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श्लोक 2.7.63  |
शूद्र विषयि - ज्ञाने उपेक्षा ना करिबे ।
आमार वचने ताँरे अवश्य मिलिबे ॥63॥ |
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| अनुवाद |
| "कृपया यह सोचकर उसकी उपेक्षा न करें कि वह भौतिक कार्यों में संलग्न एक शूद्र परिवार का है। मेरी प्रार्थना है कि आप उससे अवश्य मिलें।" |
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| "Please do not ignore him, thinking he is a Shudra preoccupied with material pursuits. I request you to meet him." |
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