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श्लोक 2.7.56  |
दर्शन क रि’ ठाकुर - पाश आज्ञा मागिला ।
पूजारी प्रभुरे माला - प्रसाद आ नि’ दिला ॥56॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान जगन्नाथ को देखकर श्री चैतन्य महाप्रभु ने भी उनसे अनुमति मांगी। तब पुजारी ने तुरंत भगवान चैतन्य को प्रसाद और एक माला भेंट की। |
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| After seeing Lord Jagannath, Sri Chaitanya Mahaprabhu asked for his permission. The priest immediately brought him prasad and a garland. |
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