श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.7.51 
भट्टाचार्य आग्रह क रि’ करेन निमन्त्रण ।
गृहे पाक करि’ प्रभुके करा’न भोजन ॥51॥
 
 
अनुवाद
भट्टाचार्य ने भगवान चैतन्य महाप्रभु को उत्सुकतापूर्वक अपने घर आमंत्रित किया और उन्हें बहुत अच्छे से भोजन कराया।
 
Bhattacharya very earnestly invited Chaitanya Mahaprabhu to his house and fed him well.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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