श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.7.45 
आज्ञा देह, अवश्य आमि दक्षिणे चलिब ।
तोमार आज्ञाते सुखे लेउटि’ आसिब’ ॥45॥
 
 
अनुवाद
"कृपया मुझे जाने की अनुमति दें, क्योंकि मुझे दक्षिण भारत की यात्रा करनी है। आपकी अनुमति से मैं शीघ्र ही प्रसन्नतापूर्वक लौटूँगा।"
 
"Please allow me to leave, as I have to travel to South India. With your permission, I will return soon and happily."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)