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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा
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श्लोक 40
श्लोक
2.7.40
जल - पात्र - वस्त्र व हि’ तोमा - सङ्गे याबे ।
ये तोमार इच्छा, कर, किछु ना बलिबे ॥40॥
अनुवाद
वह तुम्हारा जलपात्र और वस्त्र ले जाएगा। तुम जो चाहो करो; वह एक शब्द भी नहीं बोलेगा।
"He will carry your water pot and clothes. No matter what you do, he won't say a word."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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