श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.7.34 
तबे नित्यानन्द कहे , - ये आज्ञा तोमार ।
दुःख सुख ये हउक्कर्तव्य आमार ॥34॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान नित्यानंद ने कहा, "आप जो भी आदेश देंगे, वह मेरा कर्तव्य है, चाहे उसका परिणाम सुख हो या दुख।
 
Then Nityananda Prabhu said, “Your command is my duty, whether it brings us happiness or sorrow.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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