श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.7.21 
जगदा नन्द चाहे आमा विषय भुञ्जाइते ।
येइ कहे सेइ भये चाहिये करिते ॥21॥
 
 
अनुवाद
“जगदानन्द चाहते हैं कि मैं शारीरिक इन्द्रियतृप्ति का आनंद लूं, और भय के कारण मैं वही करता हूं जो वे मुझसे कहते हैं।
 
“Jagadananda wants me to indulge in physical sensual pleasures and whatever he tells me, I do out of fear.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)