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श्लोक 154
श्लोक
2.7.154
इथे अपराध मोर ना लइओ, भक्त - गण ।
तोमा - सबार चरण - मोर एकान्त शरण ॥154॥
अनुवाद
हे भक्तों, इस विषय में मेरे अपराधों पर विचार न करें। आपके चरणकमल ही मेरे एकमात्र आश्रय हैं।
O devotees, please do not dwell on my faults in this matter. Your lotus feet are my only refuge.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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