vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा
»
श्लोक 154
श्लोक
2.7.154
इथे अपराध मोर ना लइओ, भक्त - गण ।
तोमा - सबार चरण - मोर एकान्त शरण ॥154॥
अनुवाद
हे भक्तों, इस विषय में मेरे अपराधों पर विचार न करें। आपके चरणकमल ही मेरे एकमात्र आश्रय हैं।
O devotees, please do not dwell on my faults in this matter. Your lotus feet are my only refuge.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×