श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  2.7.151 
एइ त’ कहिल प्रभुर प्रथम गमन ।
कूर्म - दरशन, वासुदेव - विमोचन ॥151॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैं श्री चैतन्य महाप्रभु की यात्रा के आरंभ, उनके कूर्म मंदिर में जाने तथा उनके द्वारा कोढ़ी ब्राह्मण वासुदेव को मुक्ति दिलाने का वर्णन समाप्त करता हूँ।
 
Thus I conclude the description of Sri Chaitanya Mahaprabhu's initial journey, in which he visited the Kurma temple and saved the leper Brahmin Vasudeva.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd