श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.7.15 
नित्यानन्द - प्रभु कहे, - “ऐछे कैछे हय ।
एकाकी याइबे तुमि, के इहा सह य” ॥15॥
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु ने तब कहा, "आपका अकेले जाना कैसे संभव है? इसे कौन सहन कर सकता है?"
 
Then Nityananda Prabhu said, "How can you go alone? Who can bear it?"
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd