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श्लोक 15
श्लोक
2.7.15
नित्यानन्द - प्रभु कहे, - “ऐछे कैछे हय ।
एकाकी याइबे तुमि, के इहा सह य” ॥15॥
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु ने तब कहा, "आपका अकेले जाना कैसे संभव है? इसे कौन सहन कर सकता है?"
Then Nityananda Prabhu said, "How can you go alone? Who can bear it?"
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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