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श्लोक 2.7.140  |
अनेक प्रकार विलाप करिते लागिला ।
सेइ - क्षणे आ सि’ प्रभु ताँरे आलिङ्गिला ॥140॥ |
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| अनुवाद |
| जब कोढ़ी ब्राह्मण वासुदेव चैतन्य महाप्रभु को न देख पाने के कारण विलाप कर रहे थे, तब भगवान तुरन्त उस स्थान पर लौट आये और उन्हें गले लगा लिया। |
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| When the leper Brahmin Vasudeva was lamenting over not being able to see Mahaprabhu, Mahaprabhu immediately returned to that place and embraced him. |
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