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श्लोक 2.7.138  |
रात्रिते शुनिला तेंहो गोसाञि र आगमन ।
देखिबारे आइला प्रभाते कूर्मेर भवन ॥138॥ |
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| अनुवाद |
| फिर एक रात वासुदेव को भगवान चैतन्य महाप्रभु के आगमन की खबर मिली और सुबह वे कूर्म के घर भगवान से मिलने आये। |
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| One night Vasudeva heard of Mahaprabhu's arrival, and as soon as morning came he came to Kurma's house to see Mahaprabhu. |
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