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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  2.7.128 
यारे देख, तारे कह ‘कृष्ण’ - उपदेश ।
आमार आज्ञाय गुरु हञा तार’ एइ देश ॥128॥
 
 
अनुवाद
"सभी को भगवान श्रीकृष्ण के आदेशों का पालन करने का निर्देश दें, जैसा कि भगवद्गीता और श्रीमद्भागवत में दिया गया है। इस प्रकार एक आध्यात्मिक गुरु बनें और इस भूमि के सभी लोगों को मुक्ति दिलाने का प्रयास करें।"
 
"Teach everyone to follow the instructions of Lord Krishna as given in the Bhagavad Gita and the Srimad Bhagavatam. In this way, become a guru and strive to uplift every person in this country."
तात्पर्य
यह अंतरराष्ट्रीय कृष्ण चेतना समाज का उदात्त उद्देश्य है। कई लोग आकर पूछते हैं कि क्या समाज में शामिल होने के लिए उन्हें पारिवारिक जीवन त्यागना होगा, लेकिन वह हमारा उद्देश्य नहीं है। व्यक्ति अपने घर में आराम से रह सकता है। हम बस हर किसी से महामंत्र का जाप करने का अनुरोध करते हैं: हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे/हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे। यदि कोई व्यक्ति थोड़ा साक्षर है और भगवद्-गीता जैसी है और श्रीमद-भागवतम पढ़ सकता है, तो यह बहुत बेहतर है। ये कार्य अब एक अंग्रेजी अनुवाद में उपलब्ध हैं और सभी वर्गों के लोगों को आकर्षित करने के लिए बहुत आधिकारिक रूप से किए गए हैं। भौतिक गतिविधियों में तल्लीन रहने के बजाय, दुनिया भर के लोगों को इस आंदोलन का लाभ उठाना चाहिए और अपने परिवारों के साथ घर पर हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करना चाहिए। व्यक्ति को पापपूर्ण गतिविधियों से भी बचना चाहिए - अवैध यौन संबंध, मांसाहार, जुआ और नशा। इन चारों में से, अवैध यौन संबंध बहुत ही पापपूर्ण है। प्रत्येक व्यक्ति को विवाह करना चाहिए। खासकर प्रत्येक महिला को विवाह करना चाहिए। यदि महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है, तो कुछ पुरुष एक से अधिक पत्नियां स्वीकार कर सकते हैं। उस तरह से समाज में कोई वेश्यावृत्ति नहीं होगी। यदि पुरुष एक से अधिक पत्नियों से विवाह कर सकते हैं, तो अवैध यौन जीवन बंद हो जाएगा। व्यक्ति कृष्ण को चढ़ाने के लिए कई अच्छी तैयारी भी कर सकता है - अनाज, फल, फूल और दूध। व्यक्ति को अनावश्यक मांसाहार में क्यों लिप्त रहना चाहिए और भयानक बूचड़खाने बनाए रखना चाहिए? धूम्रपान और चाय और कॉफी पीने का क्या उपयोग है? लोग पहले से ही भौतिक भोग-विलास से नशे में धुत हैं, और यदि वे आगे नशे में धुत होते हैं, तो आत्म-साक्षात्कार का क्या मौका है? इसी तरह, व्यक्ति को जुआ में भाग नहीं लेना चाहिए और अनावश्यक रूप से मन को उत्तेजित नहीं करना चाहिए। मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य आध्यात्मिक मंच प्राप्त करना और भगवान के पास लौटना है। यही आध्यात्मिक अनुभूति का सर्वोच्च है। कृष्ण चेतना आंदोलन ब्राह्मण कूर्म को अपनी सलाह में श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वर्णित पद्धति का पालन करके मानव समाज को जीवन की पूर्णता तक ऊपर उठाने का प्रयास कर रहा है। अर्थात्, व्यक्ति को घर पर रहना चाहिए, हरे कृष्ण मंत्र का जाप करना चाहिए और कृष्ण के निर्देशों का प्रचार करना चाहिए जैसा कि उन्हें भगवद्-गीता और श्रीमद-भागवतम में दिया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)