श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  2.7.127 
प्रभु कहे, - “ऐछे बात्कभु ना कहिबा ।
गृहे रहि’ कृष्ण - नाम निरन्तर लइबा” ॥127॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "ऐसी बातें दोबारा मत करो। बेहतर होगा कि घर पर ही रहो और हमेशा कृष्ण का पवित्र नाम जपते रहो।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, “Don’t say that again. It would be better if you stay at home and always chant the name of Krishna.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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