श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 7: महाप्रभु द्वारा दक्षिण भारत की यात्रा  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  2.7.121 
‘कूर्म’ - नामे सेइ ग्रामे वैदिक ब्राह्मण ।
बहु श्रद्धा - भक्त्ये कैल प्रभुर निमन्त्रण ॥121॥
 
 
अनुवाद
एक गाँव में कूर्म नाम का एक वैदिक ब्राह्मण रहता था। उसने भगवान चैतन्य महाप्रभु को बड़े आदर और भक्ति के साथ अपने घर आमंत्रित किया।
 
In a village there lived a Vedic Brahmin named Kurma. He welcomed Sri Chaitanya Mahaprabhu to his home with great hospitality and devotion.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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