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श्लोक 2.7.121  |
‘कूर्म’ - नामे सेइ ग्रामे वैदिक ब्राह्मण ।
बहु श्रद्धा - भक्त्ये कैल प्रभुर निमन्त्रण ॥121॥ |
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| अनुवाद |
| एक गाँव में कूर्म नाम का एक वैदिक ब्राह्मण रहता था। उसने भगवान चैतन्य महाप्रभु को बड़े आदर और भक्ति के साथ अपने घर आमंत्रित किया। |
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| In a village there lived a Vedic Brahmin named Kurma. He welcomed Sri Chaitanya Mahaprabhu to his home with great hospitality and devotion. |
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