श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  2.6.99 
कलि - युगे लीलावतार ना करे भगवान् ।
अतएव ‘त्रि - युग’ करि’ कहि तार नाम ॥99॥
 
 
अनुवाद
"इस कलियुग में भगवान का कोई लीला-अवतार नहीं है; इसलिए उन्हें त्रियुग कहा जाता है। यह उनके पवित्र नामों में से एक है।"
 
“In this Kaliyuga there is no pastime of the Supreme Personality of Godhead; therefore He is called Triyuga, and this is one of His holy names.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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