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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  2.6.91 
तबु त’ ईश्वर - ज्ञान ना हय तोमार ।
ईश्वरेर माया एइ - बलि व्यवहार ॥91॥
 
 
अनुवाद
"श्री चैतन्य महाप्रभु के शरीर में परमेश्वर के लक्षणों को प्रत्यक्ष रूप से देखने पर भी, तुम उन्हें समझ नहीं सकते। इसे सामान्यतः मोह कहा जाता है।
 
"Even after seeing the characteristics of the Supreme Personality of Godhead in the body of Sri Chaitanya Mahaprabhu, you could not understand them. This is commonly called maya (illusion).
तात्पर्य
गौपीनाथ आचार्य बताते हैं कि सर्वभौम भट्टाचार्य ने पहले ही श्री चैतन्य महाप्रभु के शरीर पर असाधारण परमानंद के लक्षणों को देखा था।

परम प्रेम के ये असाधारण लक्षण परम पुरुष को इंगित करते थे, लेकिन भट्टाचार्य इन सभी लक्षणों को देखने के बाद भी भगवान के अलौकिक स्वरूप को समझ नहीं पाए। वह भगवान के कर्मों को सांसारिक समझ रहे थे। यह निश्चित रूप से भ्रम के कारण था।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)