श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  2.6.78 
‘भट्टाचार्य’ तुमि इँहार ना जान महिमा ।
भगवत्ता - लक्षणेर इँहातेइ सीमा ॥78॥
 
 
अनुवाद
"हे प्रिय भट्टाचार्य, आप भगवान चैतन्य महाप्रभु की महानता को नहीं जानते। भगवान के सभी लक्षण उनमें सर्वोच्च स्तर पर पाए जाते हैं।"
 
"O Bhattacharya, you do not know the greatness of Sri Chaitanya Mahaprabhu. He possesses all the characteristics of godliness in their fullest extent."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd