श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.6.72 
सार्वभौम कहे , - ‘इँहार नाम सर्वोत्तम ।
भारती - सम्प्रदाय इँहो - हयेन मध्यम’ ॥72॥
 
 
अनुवाद
सार्वभौम भट्टाचार्य ने कहा, "श्रीकृष्ण नाम तो बहुत अच्छा है, लेकिन वे भारती समुदाय से हैं। इसलिए वे द्वितीय श्रेणी के संन्यासी हैं।"
 
Sarvabhauma Bhattacharya said, “The name Sri Krishna is the best, but he belongs to the Bharati sect, hence he is a second class monk.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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