श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  2.6.68 
मुकुन्द - दत्त लञा आइला सार्वभौम स्थाने ।
सार्वभौम किछु ताँरे बलिला वचने ॥68॥
 
 
अनुवाद
गोपीनाथ आचार्य मुकुंद दत्त को साथ लेकर सार्वभौम के घर गए। वहाँ पहुँचकर सार्वभौम ने मुकुंद दत्त को इस प्रकार संबोधित किया।
 
After this, Gopinath Acharya took Mukunda Dutta with him to Sarvabhauma Bhattacharya's house. Upon reaching there, Sarvabhauma addressed Mukunda Dutta as follows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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