श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  2.6.64 
गोपीनाथाचार्यके कहे सार्वभौम ।
‘तुमि गोसाञि रे लञा कराइह दरशन’ ॥64॥
 
 
अनुवाद
तब सार्वभौम भट्टाचार्य ने गोपीनाथ आचार्य से कहा, "गोस्वामीजी को ले जाओ और उन्हें भगवान जगन्नाथ के दर्शन कराओ।"
 
Then Sarvabhauma Bhattacharya said to Gopinath Acharya, “Take Goswamiji and show him the darshan of Jagannathji.”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd