श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 6: सार्वभौम भट्टाचार्य की मुक्ति  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.6.50 
गोपीनाथ आचार्येरे कहे सार्वभौम ।
गोसाञि र जानिते चाहि काहाँ पूर्वाश्रम ॥50॥
 
 
अनुवाद
तब सार्वभौम ने गोपीनाथ आचार्य से कहा, “मैं चैतन्य महाप्रभु की पूर्व स्थिति जानना चाहता हूँ।”
 
Then Sarvabhauma said to Gopinath Acharya, “I want to know the previous ashrama (state) of Sri Chaitanya Mahaprabhu.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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